बेटियों के बहकते कदम को रोकने के लिए उन्हें अच्छी तालीम और तरबियत दे: कारी यूसुफ रज़ा संभली।*

*मसलक ए आला हज़रत का पैगाम सुन्नियों में आपसी इत्तेहाद: कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी।*

*जिलानी मियां व रेहान ए मिल्लत के कुल शरीफ में की गई  मुल्क और मिल्लत की खुशहाली की दुआ।*

बरेली,उर्स-ए-रज़वी के दूसरे दिन आज बाद नमाज़-ए-फ़ज़र कुरान ख्वानी हुई। इसके बाद मुख्य कार्यक्रम इस्लामिया मैदान में दरगाह सरपरस्त हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान(सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत व सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में शुरू हुआ। हाजी गुलाम सुब्हानी और आसिम नूरी ने मिलाद नज़राना पेश किया। कुरान की तिलावत से मुफ्ती ज़ईम रज़ा ने सुबह 8 बजे महफ़िल का आगाज़ किया।
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि कुल शरीफ के बाद तहफ़ुज़ मज़हब-ओ-मसलक कॉन्फ्रेंस को खिताब करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि हाल ही में अमेरिका और ईरान की बीच लड़ी गई जंग एक सियासी जंग थी इसे हरगिज़ मज़हबी जंग नहीं कहा जा सकता। अगर ईरान मज़हब इस्लाम के लिए जंग लड़ता तो पहले मस्जिद ए अक्सा,फ़िलिस्तीन,ग़ाज़ा और अफगानिस्तान के लिए लड़ता।
आगे मुसलमानों को ताकीद करते हुए कहा कि हमें अपने मुल्क और अपने आप को मजबूत करना है तो हमें उच्च शिक्षा हासिल करनी होगी। मुस्लमानों को अपने एरियो में अच्छे स्कूलों की स्थापना करनी होगी। आज के नौजवान को नशे से दूर रहकर अपना और अपने परिवार का बेहतर मुस्तबकिल बनाना है। बच्चे ही हमारे मुल्क का भविष्य है। आज हमारे मदरसों को आंतकवाद का अड्डा कहकर बदनाम किया जा रहा है बल्कि हकीकत यह है कि मदरसों से हमेशा देश प्रेम का पाठ पढ़ाया गया है। मदरसों ने देश भक्त पैदा किए है। देश के राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद,एपीजे अब्दुल कलाम आदि ने भी मदरसों से ही शिक्षा हासिल की। आखिर में देश के मुसलामानों को नसीहत करते हुए कहा कि वो ऐसे धरने प्रदर्शन से दूर रहे जिसका कोई कायद न हो। आज कितने हमारे नौजवान बेगुनाह जेलों में सालों से बंद है। कही कोई मसला पेश आए तो हम कोर्ट कचहरी और पुलिस प्रशासन का सहारा ले। उर्स का संचालन करते हुए *कारी यूसुफ रज़ा संभली* ने अपने खिताब में मुस्लिम बेटियां और उनके बहकते कदम पर फ़िक्र ज़ाहिर करते हुए कहा कि मुसलामान अपनी बेटियों को अच्छी तालीम(शिक्षा) और तरबियत(संस्कार) शरई दायरे में रहकर दे। उनके हाथों में मोबाइल की जगह कानून ए शरीयत, बहारे शरीयत जैसी किताबें दे ताकि वो समझ सके भलाई किसमें है। *कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी* ने कहा कि मसलक-ए-आला हज़रत का मिशन बहावी,देवबंदी का रद्द और सुन्नियों में आपसी इत्तेहाद है। इसी मिशन को हुज्जातुल इस्लाम,मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द, मुफस्सिर-ए-आज़म,रेहान-ए-मिल्लत समेत खानदान के बुजुर्गों ने आगे बढ़ाया। रेहान-ए-मिल्लत ने मज़हब-ओ-मसलक के फरोग के लिए यूरोप,अफ्रीका,अमेरिका समेत एशिया के मुल्कों का दौरा कर परचम-ए-रज़ा को बुलंद किया। *मौलाना साबिर उल क़ादरी(बिहार)* ने कहा कि रेहान- ए-मिल्लत जहां एक तरफ बेहतरीन शायर थे वहीं दूसरी तरफ आपने बहुत से फतवे भी लिखे। आप तलबा(छात्रों) को अरबी और इंग्लिश में भी दर्स देते थे। इसके अलावा मौलाना अव्वल रज़ा महकश(बिहार),मुफ्ती नवाजिश आलम,मौलाना जैनुल आबेदीन,मुफ्ती अकील उर रहमान आदि ने भी खिताब किया। सुबह 09 बजकर 58 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी सखावत मुरादाबादी,मुफ्ती जमील नूरी,मुफ्ती अख्तर हुसैन ने पड़ी। खुसूसी दुआ मुफ्ती आकिल रज़वी ने मुल्क ओ मिल्लत की खुशहाली के लिए की। दोपहर 01 बजकर 30 मिनट पर इस्लामिया मैदान में मुफ्ती अय्यूब नूरी ने नमाज़ ए जुमा अदा कराया। हजारों लोगों ने नमाज़ अदा की।
नासिर कुरैशी ने आज सियासी और गैर सियासी चादरें भी दरगाह पर पेश होती रहे। आंवला,फरीदपुर,मीरगंज,भोजीपुरा,बहेड़ी,तिलियापुर,देवचरा के अलावा पुराना शहर,जसोली,जखीरा,बाकर गंज,किला आदि से चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचते रहे।

*संवाददाता अलीम बेग*

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