78वें भारतीय सेना दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्तर की साइकलिंग यात्रा सुश्री आशा मालवीय (एकल महिला साइकिलिस्ट) द्वारा शुरू की गयी है, जिसमें उनके द्वारा कुल 7800 किमी0 की यात्रा जयपुर से किबिथू की दूरी तय की जाएगी। यह यात्रा जयपुर से चलकर प्रयागराज पहुंची है। प्रयागराज पहुंचने पर सुश्री आशा मालवीय का सम्मान सरस मेला, परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में प्रोफेसर अंकिता राज एवं मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह के द्वारा किया गया। सुश्री आशा मालवीय की यात्रा का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति का शशक्तीकरण, देशभक्ति व अदम्य साहस है।

इस अवसर पर सुश्री आशा मालवीय ने अपने वक्तव्य में अपने जीवन के संघर्षों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव नागाराम की रहने वाली है। बताया कि उन्होंने अभी तक 64200 किमी0 की साइकिल यात्रा पूरी कर चुकी हूं। बताया कि वे पहली ऐसी एथलेटिक्स है, जिन्होंने कन्याकुमारी से सियाचीन तक की साइकिल यात्रा पूरी की है। उन्होंने बताया कि वे बहुत ही गरीब फैमिली से थी, लेकिन मेरा मानना था कि स्थितियां-परिस्थितियां चाहे जैसी हो, मुझे अपनी जीवन में कभी भी हार नहीं माननी है। उन्होंने बताया कि मेरे जीवन की आदर्श मेरी मां रही है, उन्होंने बड़ी ही कठिनाई से मुझे आगे बढ़ाया है। सुश्री आशा मालवीय ने कहा कि महिला यदि किसी कार्य को करने की ठान ले, तो वे हर हाल में उस कार्य को, अपने सपनो को पूर्ण करके ही रहती है। उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए। हमें कभी भी मेनहत से पीछे नहीं हटना चाहिए, तभी हम जीवन की कठिन चुनौतियों को पार करके सफलता प्राप्त कर सकते है। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य व अपने सपनों को पूरा करने के लिए दूसरो के साथ की आवश्यकता जरूरी नहीं होती है। एक अकेला इंसान अगर ठान ले तो वे हर कार्य को करने में सक्षम होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में ईमानदारी से की गयी मेहनत कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है। कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए कठिनाईयां भी जीवन में बहुत उठानी पड़ती है, लेकिन हमें उन कठिनाईयों के आगे झुकना नहीं है। आपको अपनी मेहनत से दुनिया वालो को गलत साबित करते हुए अपने सपनों को पूरा करना है। कहा कि कामयाबी ऐसी होनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों को आपका उदाहरण देकर कठिन मेहनत के लिए प्रेरित किया जाये।सम्मान समारोह के दौरान साइकिलिस्ट आशा मालवीय ने कहा प्रयागराज में अतिथि देवो की जो जीवंत परम्परा है वह कही और देखने को नहीं मिलती साथ ही सेवा भाव की परम्परा से प्रयागराज प्रदेश और देश को चरितार्थ कर रहा है। सरस मेले में मौजूद विशाल महिलाओं के जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा आशा मालवीय ने जानकारी देते हुए बताया कि वह 78वें भारतीय सेना दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्तर की साइकलिंग यात्रा पर है। इस यात्रा का उद्देश्य नारी शक्ति, देशभक्ति व अदम्य साहस है । इस यात्रा का जयपुर से किबिथू के बीच 7800 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। इसी क्रम में वह जयपुर से चलकर प्रयागराज पहुंची है। आशा मालवीय ने बताया कि वह अपनी पहली साइकिल यात्रा 01 नवंबर 2022 को शुरू की थी और वह अभी तक 64 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर चुकी है। सरल मेले में मौजूद दीदियो को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन परिस्थिति चाहे जो भी आए कभी हार नहीं माननी चाहिए जिस दिन हम दृढ़ निश्चय कर लेते हुए उस दिन हमारी जीत हो जाती है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अपने संघर्ष और अपनी मां की प्रेरणा से रूबरू कराया।

इस अवसर पर प्रो0 डॉ0 अंकिता राज ने कहा कि मुझे यहां की मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह जी और साइकिलिस्ट आशा मालवीय के साथ आज यहां पर इस मंच को साझा कर विशेष और गौरव का अनुभव हो रहा है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी एवं साइकिलिस्ट आशा मालवीय के प्रेरक उद्बोधन की सराहना की। कहा कि इनकी माता जी को बहुत गर्व की अनुभूति होती होगी। उन्होंने सुश्री आशा मालवीय जी के जीवन को दूसरों के प्रेरणाश्रोत बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्य को मजबूत इरादे के साथ किया जाये, तो कितनी भी समस्यायें आयें, बिना उस लक्ष्य को प्राप्त किए हमें पीछे नहीं हटना चाहिए और निरंतरता के साथ लगे रहना चाहिये । उन्होंने सुश्री आशा मालवीय जी को उनके लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएं दी।
आयोजित कार्यक्रम में परियोजना निदेशक श्री भूपेन्द्र कुमार सिंह, श्री जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री दिनेश सिंह, ज़िला प्रोबेशन अधिकारी श्री सर्वजीत सिंह , डीसी मनरेगा श्री गुलाब चन्द्र सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में महिलायें उपस्थित रहीं

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