प्रयागराज। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, खुसरोबाग प्रयागराज में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत औद्यानिक फसलों के उत्पादन प्रबंधन, संरक्षित खेती तथा मशरूम उत्पादन तकनीक पर आधारित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य उद्यान विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह द्वारा किया गया।

उद्घाटन सत्र में डॉ. सिंह ने बताया मुख्य उद्यान विशेषज्ञ डॉक्टर वीरेंद्र सिंह द्वारा कम जोत के आकार को देते हुए आम अमरूद एवं अन्य फलदार पौधों की सघन बागवानी तथा उसके लाभ एवं कनोपी प्रबंधन फसल सुरक्षा के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई सब्जियों की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है।साथ ही ये भी बताया गया की वर्तमान समय मे शाकाहारी व्यक्तिओ के लिए समुचित पोषण सुनिश्चित करने के लिए तथा पढ़े लिखे नौजवानों के लिए स्वरोजगार स्थापित करने की दृष्टि से मशरूम उत्पादन का विशेष महत्व हैऐसे में किसान मशरूम उत्पादन अपनाकर एक अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में डॉ. एस. आर. बघेल, सीईओ शुभ सेवा एग्रो वेलफेयर फाउंडेशन, लखनऊ ने मशरूम की विभिन्न प्रजातियों विशेष रूप से ओयस्टर, बटन एवं मिल्की मशरूम की विशेषताओं तथा उनके बाजार मूल्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मशरूम सब्जियों की पूर्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है। मशरूम पूर्णतः शाकाहारी एवं उच्च पोषणयुक्त आहार है, जिसका उपयोग पौष्टिक सब्जियों के रूप में किया जाता है।

तकनीकी सत्र में मशरूम प्रसंस्करण विशेषज्ञ कुमारी ईशा ने मशरूम से बनने वाले विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों जैसे बर्गर, नमकीन, अचार, बिस्किट आदि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उत्पादों के निर्माण से किसान और उद्यमी अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

केंद्र के प्रशिक्षण प्रभारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ प्रायोगिक कार्यों के माध्यम से भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन इकाइयों का भ्रमण भी कराया जाएगा, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

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