शासन की मंशा के अनुरूप सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने, जनसाधारण की शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा विभिन्न पटलों पर लंबित मामलों की संख्या कम करने के उद्देश्य से मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल ने आज प्रयागराज कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी, संबंधित अपर जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी उपस्थित रहे।

निरीक्षण से पूर्व मंडलायुक्त ने संगम सभागार में विभिन्न पटलों से जुड़े लिपिकों एवं पटल सहायकों के साथ बैठक कर उन्हें अपने-अपने पटलों पर लंबित सबसे पुराने वादों की स्थिति तथा पेंडेंसी से संबंधित अद्यतन जानकारी तैयार रखने के निर्देश दिए।

निरीक्षण की शुरुआत अपर जिलाधिकारी (शहर) की न्यायालय से की गई, जहां पाँच वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों की समीक्षा की गई। कई मामलों में लंबित रहने के कारण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर मंडलायुक्त ने फूड सेफ्टी से संबंधित सभी प्रकरणों की सूची तैयार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में खाद्य मिलावट जैसे गंभीर आरोप नहीं हैं, उनमें शीघ्र आख्या लगाकर निस्तारण किया जाए। वहीं गंभीर मामलों में विधिसम्मत अभियोजन की कार्रवाई करते हुए उन्हें भी समयबद्ध रूप से निष्पादित किया जाए।

फूड सेफ्टी एवं रेंट कंट्रोल से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि पाक्षिक आधार पर विशेष कैंप आयोजित कर लंबित प्रकरणों का निस्तारण कराया जाए, जिससे पेंडेंसी में कमी लाई जा सके।

मंडलायुक्त ने न्यायिक सहायक (जे.ए.) न्याय के पटल का भी निरीक्षण किया, जहां टाउन एरिया से संबंधित वादों का निस्तारण किया जाता है। गार्ड फाइल की समीक्षा के दौरान आवश्यक आदेशों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से संलग्न रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही संबंधित अपर जिलाधिकारी को पटलवार लंबित मामलों की मासिक समीक्षा कर उनके निस्तारण की प्रगति सुनिश्चित करने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर पटल सहायक द्वारा की गई प्रविष्टियां त्रुटिपूर्ण पाए जाने पर उन्हें फटकार लगाते हुए सभी प्रविष्टियों की पुनः जांच कर उन्हें सही कराने के निर्देश दिए गए।

सर्विसेज सत्यापन से संबंधित लंबित प्रकरणों के संबंध में बताए जाने पर की यहां से रिपोर्ट भेजे जाने के बाद भी पुलिस कमिश्नर कार्यालय से सत्यापन आख्या समय से प्राप्त नहीं हो पाती है, मंडलायुक्त ने लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर जिलाधिकारी के माध्यम से पुलिस कमिश्नर को अवगत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली में सुधार का सुझाव देते हुए कहा कि वर्तमान में अलग-अलग प्रविष्टियों के लिए कई रजिस्टर होने से समन्वय में कठिनाई होती है। इसलिए सत्यापन आख्या प्राप्त होने के बाद उसी रजिस्टर में प्रविष्टि दर्ज करने अथवा एक अतिरिक्त कॉलम जोड़कर टिप्पणियां अंकित करने की व्यवस्था लागू की जाए।

मंडलायुक्त ने डाक विभाग, न्यायिक अभिलेखागार और राजस्व अभिलेखागार का भी निरीक्षण किया। फाइलों की व्यवस्थित स्टैकिंग सुनिश्चित करने तथा जिन कपड़ों में फाइलें सुरक्षित रखी गई हैं उन्हें आवश्यकतानुसार ठीक करने या बदलने के निर्देश दिए गए। अभिलेखागारों में फाइलों की सूचीबद्धता संतोषजनक न पाए जाने पर सभी फाइलों का व्यवस्थित इंडेक्स तैयार कराने के निर्देश दिए गए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर अभिलेख आसानी से उपलब्ध हो सकें। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर चकबंदी एवं अन्य विभागों से आवश्यकतानुसार लेखपालों तथा अधिकारियों की टीम बनाकर सहयोग लेने को कहा गया। न्यायिक अभिलेखागार में थाना-वार तथा राजस्व अभिलेखागार में तहसील-वार इंडेक्सिंग करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अत्यंत पुराने एवं अनुपयोगी अभिलेखों की सूची बनाकर नियमों के अनुसार उनका विधिवत निस्तारण करने को कहा गया।

निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने एसएलएओ तथा एलआरसी कार्यालयों का भी अवलोकन किया। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि न्यायालयों में लंबित मामलों के कारण अवरुद्ध सरकारी प्राइम भूमि की प्रभावी पैरवी कर उसे मुक्त कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएं, ताकि इन परिसंपत्तियों का उपयोग जनहित के कार्यों में किया जा सके।

इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर स्थित क्लॉक टावर का भी निरीक्षण किया गया। घड़ी बंद पाए जाने पर उन्होंने जिलाधिकारी को स्मार्ट सिटी परियोजना के माध्यम से उसे शीघ्र दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।

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