महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह के कुशल मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता श्री सतेंद्र कुमार , मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता ( प्रोजेक्ट -।।) श्री भोलेन्द्र सिंह एवं समस्त मुख्यालय की टीम के सक्रिय सहयोग से इस नई तकनीक से अब ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे कम दूरी पर भी सुरक्षित रूप से चलाई जा सकेंगी, जिससे खंड की लाइन क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में सुधार होगा। साथ ही इस तकनीक से ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।
इस परियोजना के तहत कुल तीन ब्लॉक सेक्शन एक ही दिन में चालू किए गए, जो कठिन भू-भाग में एक बड़ी उपलब्धि है। तीन प्रमुख स्टेशनों (मुरैना- सिकरौदा एवं हेतमपुर ) पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को उन्नत किया गया, जिससे सिग्नल संचालन और अधिक सटीक एवं तेज़ हुआ है। इस खंड में 80 अत्याधुनिक ट्रैक डिटेक्शन उपकरण (MSDAC) लगाए गए हैं, जो ट्रेन की स्थिति का सटीक पता लगाते हैं और सिग्नलिंग को और अधिक भरोसेमंद बनाते हैं।
इसके अतिरिक्त चौदह सिग्नलों को अपग्रेड करके अब उन्हें चार पहलू वाला बनाया गया है, जिससे लोको पायलट को दूर से ही स्पष्ट संकेत मिलते हैं और ट्रेन की गति व नियंत्रण में सुधार होता है।
इस वित्तीय वर्ष में अभी तक झाँसी डिवीज़न के दिल्ली- चेन्नई मेन लाइन रूट में कुल 16 ब्लॉक सेक्शन ( 117.75 किमी) चालू किए जा चुके हैं ।
झाँसी मंडल द्वारा की गई यह पहल न केवल रेल संरक्षा को सशक्त करती है बल्कि यात्रियों को अधिक समयबद्ध, सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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