रेलवे सुरक्षा बल द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ रेलवे परिसरों और ट्रेनों में मिलने वाले असुरक्षित, संकटग्रस्त या बिछड़े हुए बच्चों को सुरक्षित बचाने का एक निरंतर और संवेदनशील अभियान है। यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उन अनगिनत बच्चों के लिए जीवनरेखा है, जो किसी कारणवश अपने घरों से दूर भटक जाते हैं। इस पहल के माध्यम से रेलवे सुरक्षा बल ने बाल सुरक्षा एवं संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे बाल श्रम, बाल तस्करी तथा लापता बच्चों से संबंधित मामलों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में रेलवे सुरक्षा बल टीम द्वारा ऑपरेशन ‘नन्हें फरिश्ते’ के अंतर्गत 442 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया। इसी क्रम में दिनांक 22.02.2026 को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक नाबालिग बालक को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया।

उप निरीक्षक नितिन कुमार टीम के साथ प्लेटफार्म संख्या 01 गश्त पर थे, तभी लगभग 4 वर्षीय एक बालक रोता हुआ मिला। पूछताछ करने पर बालक ने अपना नाम राजू तथा माता का नाम पिंकी बताया।

इसकी सूचना तत्काल चाइल्ड लाइन कानपुर को दी गई। सूचना पर चाइल्ड लाइन सदस्य आरपीएफ/कानपुर सेंट्रल पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत बालक को सकुशल चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर दिया गया।

रेलवे सुरक्षा बल यात्रियों से अपील करता है कि यात्रा के दौरान अपने बच्चों पर विशेष ध्यान रखें तथा किसी भी असहाय या बिछड़े बच्चे की जानकारी तुरंत रेलवे सुरक्षा बल या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें।

अमित कुमार सिंह
जनसम्पर्क अधिकारी
प्रयागराज मंडल, उत्तर मध्य रेलवे

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